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द्रष्टि:

बच्चे बहुत ही संवेदनशील होते है । वो जो देखते हैं अनुभव करते हैं, (ग्रहणशील) वही सीखते हैं । यदि बचपन में वो प्रेम, आनंद, सत्य, अहिंसा, करुणा का अनुभव करे तो वे यही भाव सीखत भी है । परंतु वे यदि हिंसा, असत्य, संवेदनहीनता का अनुभव करते हैं तो वे यही भाव सीखते है ।

बच्चे बचपन मे जो प्राप्त करते है वो उसे दोगुना करेके समाज को पुन: देते है । यदि हम बच्चे को थप्पड मारके टी.वी. बंद करवाते है, गृहकार्य कराते है, कक्षा मे शांति रखने का प्रयत्न करते है, तब बच्चा अहिंसा सीखता है और बडा होकर समाज को पुन:अहिंसा ही लौटाता है ।

यदि हमे समाज मे अहिंसा और शांति चाहिए तो बच्चो को उसका भरपूर एहसास कराना चाहिए ।

P4P अभियान मा बाप, शिक्षकगण एवं अभिभावको को बच्चे को प्रेम व आनंदपूर्ण बचपन प्रदान करने के (अहिंसक, संवेदनशील परवरिश) लिए सक्षम बनाने का प्रयास करता है । इसके लिए P4P अभियान माता – पिता व शिक्षको की निस्चित समय मे नियमित तालीम के लिए भी प्रयास करता है ।

दिशा :

एक मीटिंग मे एक साथ एसा विचार प्रस्तुत किया – हम सब अलग – अलग कार्य कर रहे है, उसके बदले बहुत ही कम स्कूलो मे कार्य करे लेकिन, उनको P4P की जानकारी के लिए जो कुछ देने की आवश्यकता हो वो सब कुछ दें और फिर उसका क्या परिणाम आता है वो देखे –

मेरा उत्तर ये है ,

  • P4P के सारे Input लंबे समय तक देने के लिये कोई विधालय अथवा अभिभावक गण तैयार होते है क्या ?
  • अगर तैयार भी होते है तो भी 10, 15, 20 विधालयो के लिए हम कार्य करते है तो हमारा कार्य मर्यादित हो जाता है ।
  • यदि इन विधालयो मे जबरदस्त परिणाम आता है तो इसका अर्थ ये नही है कि सभी विधालय ये करने के लिए तैयार हो जाएंगे ।
  • अभी हम सब जो अलग अलग काम कर रहे है, वो बीज बोने का काम है ।
  • ये काम छोटा नही है । संसार भर मे P4P के बीज बोएँ जाते तो ये बहुत बडा कार्य है ।
  • असंख्य माता-पिता ऎसे है कि जो ये जानते तक नही है कि बच्चे की परवरिश पर ध्यान भी देना होता है ।
  • ऎसे माता-पिता को उनके परवरिश के बारे मे पता चले तो ये भी बडा काम है ।
  • इसकी वजह से असंख्य बालको के जीवन मे परिवर्तन आएगा ।
  • जहाँ योग्य धरती होगी वहीं बीज अंकुरित होगा ।
  • यह सोच ही बीज बिखेरने का काम करेगी ।
  • बीज बिखरने के साथ-साथ उडान वाले कार्य हम कर ही सकेगे ।
  • ऎसे कार्य आज भी हो रहे है, FAQ, Suicide Parenting जैसे कार्य हो ही रहे है ।
  • इस प्रकार अपने Vision 2015 मे बीज बोने का व लंबे समय का इन दोनो कार्यो का समावेश होना चाहिए ।

P4P अंकुर

P4P प्रसार (बीजे बिखरने का कार्य )

  • अलग अलग माध्यमो से लोगो को इस अभियान की जानकारी मिलती हिअ वैसे-वैसे P4P का परिचय देने की तक भी मिलती जा रही है । परिस्थिति के अनुसार इन तको का उपयोग करना ।
  • 10 मिनिट का ही समय मिले तो स्कीट प्रस्तुत करना ।
  • राज्य मे या राज्य के बाहर दूर के स्थलो मे P4P का कार्यक्रम करने का अवसर प्राप्त हो तो –
  • कम से कम 2 घंटे का समय प्राप्त हो और टीम के खडे होने की संभावना हो तो कोर टीम मे से किसी को जाना होगा ।
  • नही तो निमंत्रण देने वाले को अथवा वो जिसको चुनता है उसे P4P का परिचय देने के लिए तैयार करके उसके द्वारा परिचय दिलाएँ ।
  • भविष्य मे इस विषय मे अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करके कार्य करने की इच्छा धारण करने वाले लोगो को भविष्य मे बडे (कम से कम 2 घंटे के) कार्यक्रम के लिए तैयार करना ।

P4P टीम

  • पेरेन्टिंग फोर पीस (P4P) अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चो को प्रेम और आनंदपूर्ण बचपन प्रदान करके विश्व में शांति स्थापित करने का है । हम सभी मा-बाप और शिक्षको को बच्चो को ऎसा बचपन प्रदान करने के लिए सक्षम बनाना चाहते हैं । इसलिए, अभिभावको और शिक्षको को तालीम देना अपना मुख्य कार्य है ।
  • इस विचार मे विश्वास मानने वाले एवं उसमे काम करने की इच्छा धारणा करने वाले लोगो की टीम द्वारा अलग अलग जिलो, शहेरो एवं नगरो मे ये काम किया जा रहा है ।
  • विश्व के प्रत्येक शहर नगर और कस्बो मे टीम खडी करके हम इस कार्य को विश्व के कोने-कोने फैलाना चाहते है । आप भी टीम बना के इस यज्ञ कार्य मे जुड सकते है ।

P4P टीम कैसे बनाएँगे ?

  • इस कार्य करने की इच्छा धारण करनेवाले आपके मित्र, अपने विस्तार के लोगो की इकट्ठा करके अभियान के बारे मे माहिती देकर आप उनको टीम मे जुडने का आमंत्रण दो ।
  • P4P टीम मे जुडने की इच्छा धारण करने वाले लोगो के संपर्क नंबर, ईमेईल एड्रस प्राप्त कर ले ।
  • उसके बाद के सप्ताह मे ही प्रथम मीटिंग (गोष्ठी) बुलाऎं । मीटिंग की तारीख (दिनांक), समय तथा स्थल उसी समय सूचित करे ।
  • वहा उपस्थित लोगो के मित्र भी यदि इस मीटिंग में इच्छा जताते है तो उन्हें भी मीटिंग मे बुलाने की जाज करे ।
  • जुडे हुए लोगो के दो Whatsapp गृप बानएँ । (1) संचार के लिए (2) प्रेरणात्मक या बोधगम्य संदेश भेजने के लिए । जीससे Communication गृप मे मात्र संदेशो का आदान-प्रदान हो और प्रेरणात्मक संदेश Communication में कोई व्याधि ना उत्पन्न करें ।
    जैसे : p4pDharampur – Communication
    p4pDharamput – Inspiration
  • गृप फोटो के तौर पर P4P के लोगो का उपयोग करना ।
  • (Communication) संचार गृप में भी प्रथम मीटिंग के संदेश भेजना
  • प्रथम मीटिंग में जिम्मेदारियो का वितरण करना ।
  • टीम थोडे समय कार्य करे उसके पश्चात उसके संयोजक (Coordinator) और उप-संयोजक (Co-cordinator) पसंद करना । याद रहे कि ये कोई पद नही जिम्मेदारी है ।

सामान्य जिम्मेदारियाँ :

  1. Whatsapp ऎडमीन
  2. स्कुलो आदि मे संपर्क करके तालीम कार्यक्रम करने के लिए निमंत्रण प्राप्त करना ।
  3. प्रशिक्षक के तौर पर कार्य ।
  4. कार्यक्र्म का विवरण तैयार करना ।
  5. स्कीट करना ।
  6. प्रेजन्टेशन आदि बनाना ।

टीम बनाने के लिए दूसरे और भी कई रास्ते (मार्ग) :

  • पडोशी नगर की हयात टीम / सूरत से किसी को p4p का परिचय देने के लिए बुलाना । परिचय एवं उसमे जुड्ने के इच्छित लोगो के अनुसार टीम बनाना ।
  • बाल परवरिश से संबंधित कोई भी तालीम कार्यक्रम मे अन्य विषयो के उपरांत p4p का परिचय देना । जुडने के लिए इच्छित लोगो को कार्यक्रम के अंत मे 10 मिनिट के लिए रूकने के लिए कहना । रूके हुए लोगो के साथ उपरोकतानुसार बात करके टीम बनाएँ ।

टीम को मजबूत बनाना

  • टीम के सभ्यो के काम करने की क्षमता बढाने के लिए उनके लिए 1 दिन का तालीम कार्यक्रम (TOT- Training of Trainers ) का आयोजन करे । जिससे वो लोग माता-पिता व शिक्षको को तालीम देने के लिए सक्षम बने ।
  • टीम के सभ्यो के तौर पर तालीम देने की क्षमता धारण करनेवाले लोग टीम के सभ्यो को प्रत्येक हफ्ते / 15 दिन मे एक विषय पर तालीम दे । ये हुआ आंतरीक क्षमतावर्धन ।
  • P4p बनने के लिए संपर्क करे. वैभव परीख : 9099010677

टीम मे कार्य करने से क्या फायदा होगा ?

  • टीम मे जुडने से एक दूसरे की शक्ति और क्षमता पूरक साबित होगी । जैसे – एक व्यक्ति बहुत अच्छी तालीम दे सकता है परंतु उसक संस्थाओ से कोई संपर्क नहीं है, जीससे उसे तालीम देने की तक नही मिलती । दूसरी ओर टीम से जुडे दूसरे लोगों के एसी संस्थाओ से अच्छे संबंध है, जीससे वो उस अच्छी तालीम देने वाले व्यक्ति को तालीम देने के लिए उन संस्थाओं मे तक उपस्थित करेगा ।
  • अकेला व्यक्ति थक जाए अथवा संजोगवश कभी वो समाजकार्य नहीं कर सकता तो शुरू किया गया कार्य टूटने की स्थिति मे आ जाता है । यदि टीम है तो एसा नहीं होगा । टीम का प्रत्येक सदस्य अपने अनुकूल कार्य करता है, तो भी सतत कार्य चालू ही रहता है

मीडिया नीति

  • P4p का प्रचार हेतु प्रसार
  • विचार का प्रसार
  • प्रवृतिओ से लोग जानकारी ले और उसका लाभ उठाएँ ।
  • व्यक्तिगत प्रचार से दूर रहे ।
  • प्रचार का हेतु इस विचार का प्रचार हो और बच्चो को आनंदमय बचपन देने का कार्य अधिक से अधिक से अधिक हो ये है । प्रचार मुख्य हेतु बन जाए और प्रमुख कार्य दूसरी ओर रह जाए, इसका ध्यान रखना है ।
  • कार्यक्रम से पहले उसकी जानकारी लोगो को प्राप्त हो और उसका लाभ वो लोग ले सके और कार्यक्रम बाद लोगो को उसकी सही जानकारी हो और भविष्य में एसे अधिक से अधिक कार्यक्रम हों और अधिक से अधिक लोग उसमे हिस्सा ले, इसके लिए मीडिया के माध्यम से लोगो को जानकारी दे ।
  • P4p का कार्य करके या फिर उसका प्रचार करके हम महान कार्य कर रहे है । एसा ‘अहं’ मन मे नही लाना चाहिए ।
  • फोटो सिंचवाने या फिर छपाने के लिए कोई कार्यक्रम नहीं ।
  • सिध्धांतो की तोडमरोड करके या फिर उन्हें नुकशान पहुचाने का कोई प्रसार कार्य नही ।
  • प्रसिध्ध या लोकप्रिय होने की लालसा / मोह कदापि नहीं ।

p4p पब्लिक रिलेशन

  • प्रत्येक टीम में पब्लिक रिलेशन की एक छोटी सी टीम ।
  • मीडिया मे कार्य कर रहे लोग या फिर मीडिया सु जुडे हुए लोग जो इस टीम में हों तो वो इस टीम मे अच्छी तरह से कार्य कर सकते है ।
  • पब्लिक रिलेशन का कार्य भी लगभग उपर के सिद्धांतो को ध्यान मे रखकर ही करना ।

p4p टेकनोलोजी टीम

  • टेकनोलोजी के माध्यम से p4p का प्रचार-प्रसार करना और उसकी असरकारकता बढाना ।

विविध वर्गो के लोगो के लिए कार्यक्रम

p4p मीडिया कार्यक्रम

  • मीडिया के प्रतिनिधियों के लिए p4p परिचय अथवा उनको जरूरी हो ऎसे पेरेन्टिंग के विषय का तालीम कार्यक्रम का आयोजन करें ।

हेतु :

  • अपनी प्रवृतिओ क लाभ उनको और उनके माध्यम से उनके बच्चो को मिले ।
  • वे लोग p4p के कार्य से परिचित हो और किसी को टीम से जुडने की इच्छा हो तो वो जुडे ।
  • उनको योग्य लगे वैसी p4p की प्रवृतिओं को वे लोग समाचारो मे कवर करे ।
    एसे ही बाल रोग चिकित्सक, मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिको के लिए भी उनके संगठनो के माध्यम से क्रार्यक्रम करना ।

p4p वर्कर / स्वयं सेवक

  1. बुजुर्ग (सीनियर सीटीजन) अपने अनुभव एवं व्यर्थ समय मे अपना बडा योगदान दे सकते है । और काम करने का संतोष प्राप्त कर सकते है ।
  2. गृहिणियाँ व्यर्थ समय का उपयोग करके समाज को कुछ प्रदान करने का संतोष प्राप्त कर सकती है ।
  3. शिक्षकगण व्यर्थ समय का उपयोग करके कुछ प्रदान करने का संतोष प्राप्त कर सकते है ।
  4. निवृत शिक्षकगण व्यर्थ समय का उपयोग करके प्रदान करने का संतोष प्राप्त कर सकतो है ।
  5. BRC /CRC (शिक्षक विभाग के उपधिकारी) अपने कर्तव्य के रूप में ये कार्य कर सकते है ।
  6. मनोचिकित्सक, बाल मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, बालरोग चिकित्सक PTC, B.Ed., कोलेज के प्रोफेसर आदि जैसे लोग अपने ज्ञान के माध्यम से योगदान कर सकते है ।
  7. महिलओ का संपर्क अखिल हिन्द महिला परिषद जैसी संस्थाओ के माध्यम से हो सकता है ।

स्वयंसेवक क्या कर सकते है ?

  1. आपके शहर की p4p टीम में जुड्ना ।
  2. आपके शहर में p4p टीम शुरू करना ।
  3. ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण देना ।
  4. प्रशिक्षन सामग्री तैयार करना ।
  5. तैयार प्रशिक्षण सामग्री का अन्य भाषा में उपनुवाद करना ।
  6. माता-पिता शिक्षको की काउन्सेलींग करना । (काउन्सेलर के रूप मे कार्य करना )
  7. काउन्सेलींग सेन्टर शुरू करना ।
  8. P4p की चलती फिरती ओफिस मे स्वयंसेवक के रूप में कार्य करना – पत्र व्यवहार करना, रीपोर्ट लिखना, संपर्क करना, डीझाइन तैयार करना, न्यूझ लेटर की एडिंग करना आदि ।
  9. प्रशिक्षण दौरान स्कीट प्रस्तुत करना ।
  10. P4p को अभिभावक कि शिक्षको को प्रशिक्षण देने का अवसर मिले इसलिए स्कूल, संस्थाओं की ओर से निमंत्रण प्राप्त करना ।
  11. सामाजीक संमेलन / अन्य कार्यक्रमों मे बाल परवरिश से संबंधित बात करने की तक खडी करना ।
  12. स्कूल के बच्चों को बाल फिल्म दिखाने के लिए p4p के साथ MOU करना ।
  13. p4p स्कूल बने ।
  14. p4p शिक्षक बने ।
  15. p4p अभिभावक बनें और अन्य लोगो को भी बनाएँ ।

p4p स्वयसेवक बनने वाले को क्या लाभ होगा ?

  1. अपने बच्चे की परवरिश और भी अच्छे से करने के लिए सक्षम बनते है ।
  2. अपने विधार्थियो के साथ योग्य व्यवहार कर सकेंगे ।
  3. समाज कार्य करने का संतोष मिलेगा ।
  4. नेतृत्व के और टीम मे कार्य करने के गुणो का विकास होगा ।
  5. समाज मे परिवर्तन लाने का काम कर सकते है ।
  6. सामाजिक कार्य करने का संतोष पाप्त होगा ।
  7. स्वयं के व्यकितत्व का विकास होगा ।

p4p युवा स्वयंसेवक

  • नवयुवको के समय एवं ऊर्जा का उपयोग हम इस अभियान मे कर सकते है, जिससे नवयुवको का स्वविकास हो । उनका स्टॆज फियर यानी कि स्टॆज मे खडे होने का डर दूर हो तथा उनकी अभिव्यक्ति मे सुधार हो ।
  • नवयुवको मे शादी से पहले विवाह पूर्व, विवाह पश्चात अभिभावक की भावना उत्पन्न की जा सके । उससे स्वयं का विकास होगा ।

p4p इन्टर्नशीप

  • कोलेज के बहुत से अभ्यासक्रम मे खास करके BSW / BCS, MSW विधार्थियो को इन्टरशिप अथवा प्रोजेकट करने होते है ।
  • इन विधार्थियो को p4p का कार्य सौप सकते है ।
  • अभिभावक गण व शिक्षक का प्रशिक्षण ।
  • उनका बच्चो के साथ व्यवहार का अभ्यास ।
  • झुपडपट्टीओ के अभिभावको की मानसिकता तथा बच्चो की स्थिति का अभ्यास ।
  • बाल अत्याचार का प्रमाण असर के विषय मे अभ्यास ।

p4p पार्टनर

    p4p के विजन अनुसार कार्यरत संस्थाओ के साथ हिस्सेदारी हो सकती है ।

    एसा करने से निम्न लाभ होगे –

    p4p जिस क्षेत्र मे अभी कार्य नही कर सकता उस क्षेत्र मे कार्य करने की संभावनाएँ उत्पन्न होंगी (जैसे – झुपडपट्टी मे निवास कर रहे माता-पिता व बच्चे )
  • इन संस्थाओ को कार्य की गति मिलेगी ।
  • ये संस्थएँ अच्छे व व्यवस्थित रूप से कार्य कर सके, इस लिए p4p मार्गदर्शक बने ।
  • एसी संस्थाओ को जोडने का कार्य p4p करे ।
  • ये संस्थाएँ जैसा कार्य कर रही है, वैसा ही कार्य p4p के सदस्य भी शुरू कर सकते है ।
  • p4p की क्षमताएँ एवं ये संस्थाओ की क्षमता के मध्य मे सिनर्जी ( 1+1=11 ) का सर्जन होगा ।

जैसे –

  • मैं ज्योतिधर हूँ । अभियान के ज्योतिर्धरो के पास प्रशिक्षण देने की क्षमता है । p4p की टीम के लिए प्रशिक्षण देने के लिए अवसर उपस्थित करने की क्षमता है । दोनो मिलकर बडे रूप में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण कर्यक्रम कर सकते है ।
  • शैशव (भावनगर) के साथ जुडकर बालसेना के मोडल का विस्तार कर सकते है ।
  • अनाथ बच्चों को दत्तक लेने का कार्य कर रही वात्सल्य एज्युकेशन एन्ड चेरीटॆबल ट्रस्ट (बारडोली) अपना कार्य और भी अच्छे से कर सके, इसलिए p4p मार्गदर्शक बन सकता है ।
  • दूसरी जगहों में अन्य संस्थाएँ इस मोडेल पर कार्यरत हो इसलिए p4p मददरूप हो सकता है ।
  • पेडियाट्रीक, साइकियाट्रीक एसोशिएशन एडोलेशन्ट हेल्थ एकेडमी के साथ भी एसी पार्टनरशीप कर सकते है ।

p4p स्कीट

  • स्कीट बहुत ही कम समयमे असरकरक रूप में अपना संदेश पहुँचाती है ।
  • अगर शक्य हो तो अच्छी स्कीट का दो केमेरो से वीडियो रेकोर्डिग करना ।
  • वैभव- विराज को p4p परिचय की15 मिनिट की स्कीट तैयार करके रेकोर्ड करानी होगी ।

p4p फिल्म

  • इस विचार से संबंधित अलग-अलग विषयो को प्रस्तुत कर रही 1 से 2 मिनिट की फिल्म बनानी होगी ।

p4p कविता

  • p4p के विचार को असरदायक तरीके से स्पष्ट कर सके एसी कविता लिखे ।
  • बाल परवरिश से संबंधित अलग अलग विषयो का संदेश देती कविताएँ ।
  • सभी को समझ में आ जाए एसा प्रत्यक्ष संदेश, कुछ ही लोगो के समझ मे आए ऎसे परोक्ष संदेश की अपेक्षा अधिक योग्य है ।

p4p विज्ञापन

  • प्रत्यक्ष संदेशो का संक्षेप ( 20-30 सेकन्ड का विज्ञापन )
  • ગયા બાલ સપ્તાકહ નિમિત્તે ફર્નિચર દ્વારા આવા બે વિજ્ઞાપનો (ચેનલનું નામ) પર આપવા.

p4p स्टोल

  • शिक्षण से संबंधित कार्यक्रमो में मेलो में ( जैसे पुस्तक मेला ) मे p4p का स्टोल उपस्थित करना ।
  • मेलो, समूहलग्न, कथा आदि मे p4p परिचय के अवसर प्राप्त करना ।
  • अभिभावको के कार्यक्रम मे भी आयोजक की सहमती से एक टॆबल लेकर p4p स्वयंसेवक ये माहिती (जानकारी) दे सकते है ।
  • ज्ञाति / समाज / ग्राम मेलो मे भी ये कार्य कर सकते है ।

स्टोल कैसे शुरू करना है ?

  • आयोजको से (रूबरू) स्वयं मिलकर p4p की जानकारी देकर बिनामूल्य के स्टोल खडी करने का निवेदन करे और निवेदन पत्र भी दे ।
  • पत्र देना आवश्यक है जिससे आयोजक की ओफिस द्वारा फोलोअप हो सके ।
  • इस पत्र के अतिरिक्त उनकी ओफिस में भी एक पत्र दे ताकि यदि आयोजक को दिया हुआ पत्र कहीं खो जाए तो भी कार्य में व्याधि उत्पन्न न हो ।
  • आयोजक से मिलने मे विलंब हो रहा हो तो पहले पत्र अवश्य भेज दें ।
  • बहुत बार पत्र से भी काम हो जाता है ।

स्टोल पर देने वाली माहिती (सूचना)

  1. मुलाकातियो (उपस्थित लोगो को ) p4p की माहिती (सूचना) का ब्रोसर दे ।
  2. अभियान का मुखय विचार, मुख्य प्रवृतियाँ, website की जानकारी देना ।
  3. जो लोग इसमे सामिल होन चाहते हैं, उनका फोर्म भराएँ ।
  4. फोर्म में से उनको जिस विषय मे अधिक रूचि हो उस विषय में अधिक जानकारी दे ।

स्टोल की व्यवस्था

  1. स्टोल मे हर बार एक p4p सदस्य उपस्थित रहे ।
  2. उनके साथ कॉलेज के विधार्थी जैसे युवा स्वयंसेवक उपस्थित रहें ।
  3. नए युवा स्वयंसेवको के तैयार करने का ये एक अवसर है ।

स्टोल मुलाकाती का फोर्म

नाम :

टेलीफोन नं :

ई-मेईल एड्रेस :

पता :

  1. कया p4p स्वयंसेवक बनना चाहता है ?
  2. p4p माता-पिता बनना चाहता है ?
  3. p4p शिक्षक बनना चाहता है ?
  4. p4p स्कुल बनाना चाहता है ?
  5. अपने शहर /जिले में p4p टीम उपस्थित करना चाहता है ?
  6. हयात p4p टीम में जुडना चाहता है ?
  7. दो शिक्षको के लिए प्रशिक्षण (तालीम) कार्यक्रम का आयोजन करना चाहता है ?
  8. भिभावको के लिए प्रशिक्षण (तालीम) कार्यक्रम का आयोजन करना चाहता है ?
  9. अपने शहर / कस्बे की स्कूलो मे बाल फिल्म दिखाने के लिए p4p से जुडना चाहता है ?
  10. अन्य तरीके से यदि योगदान देना चाहते हैं तो उसका विवरण ।

p4p पहचान

p4p branding

  1. बाल सप्ताह
  2. फादर्स डे
  3. मदर्स डे
  4. शांति दिवस
  5. वेलेन्टाइन डे
  6. मेन्टल हेल्थ डे
  7. वल्ड पेरेन्ट्स डे (1 जून)

p4p थीम सोंग

अब उसका समय परिपक्व हो गया है । हिंतनभाई व्यास (भावनगर) जैसे लोग थीम सोंग तैयार करके रेकोर्ड करे । (गुजराती और हिन्दी दोनो भाषा मे) यदि अंग्रेजी मे हो तो भी बहुत अच्छा ।

p4p branding Ideas

  1. एक जैसी डिजाइन
  2. लोगो
  3. बेनर
  4. निमंत्रण पत्रिका
  5. स्टेन्ड स्लोगन
  6. थीम सोंग
  7. ब्राउसर
  8. p4p मेसेज (Whatsaap broadcasting ) सुविधा द्रारा
  9. p4p स्क्रीन सेवर ।
  10. p4p डिजाइन टीम

  11. ब्रोसर, बेनर, स्टेन्ड, निमंत्रण पत्रिका, थैली, स्लाइड शो आदि की डिजाइन
  12. केन्द्रीकृत तरीके से डिजाइन पसंद की जाएगी । जिसका उपयोग तमाम टीम करेगी ।
  13. इस कार्य के लिए स्वयंसेवक के रूप मे जुडकर अपने घर बैठे डिजाइन तैयार करके आप अपना योगदान दे सकते है ।

दिर्धकालीन कार्य

डिस्लेक्षियावाले बच्चों के लिए कार्य

  • लगभग 15 प्रतिशत बच्चे डीस्लेक्सिक होते है ।
  • ऎसे बच्चों को लिखने, पढने, गिनने में बहुत तकलीफ होती है ।
  • माता-पिता और शिक्षक ये मानते है कि ऎसे बच्चे जान-बूझकर ऎसा करते है ।
  • इस लिए उनके (बच्चो) के साथ शारिरिक एवं मानसिक हिंसा करते है ।
  • डिस्लेक्सिया के विषय मे माता-पिता तथा शिक्षको को जानकारी देने से वो उन बच्चो के साथ अच्छा व्यवहार करेंगे या फिर यूँ कहें की उनका बच्चो के साथ व्यवहार सुधर जाएगा ।
  • ऎसे बच्चे पूरी कक्षा मे व्याधि उत्पन्न करते है ।
  • उनके काउन्सेलिंग की व्यवस्था प्रत्येक स्कूल में शुरू करने से शांतिमय बालपरवरिश की दिशा मे एक सुचरू कदम उठा सकते है ।
  • p4p सूरत टीम के लिए जागृति के लिए प्रेजेन्टेशन हैं । लेकिन काउन्सेलिंग तक पहुँचा सके उसके लिए तैयारियाँ (पुस्तक, मोड्युल इत्यादि तैयार करने का कार्य चालू है । )

आत्महत्या निवारण

  • बच्चों में आत्महत्या दर कम नही है । जितने बच्चे आत्महत्या करते हैं, उन बच्चों की अपेक्षा दो गुने बच्चे आत्महत्या करने के बारे में सोचते है ।
  • बच्चे मात्र परीक्षा या फिर उसके परिणाम की चिंता में ही आत्महत्या करते है एसा नही है, उसके और भी कई कारण हो सकते है ।
  • इस लिए बाल हत्या निवारण p4p के लिए महत्वपूर्ण कार्य है ।
  • p4p टीम द्रारा बच्चों मे आत्महत्या निवारण के लिए प्रेजेन्टेशन तथा पुस्तक आदि तैयार किए गए है ।
  • जिला शिक्षक अधिकारी (सूरत) के द्रारा यह पुस्तक प्रकाशित किया गया है ।
  • 29 दिसंबर 2014 को माननीय शिक्षण मंत्री श्री भूपेन्द्रसिंह चूडासमा की उपस्थिति में सूरत जिले के 1200 स्कूल संचालको एवं आचार्यो को ये प्रशिक्षण दिया गया ।
  • ऎसा प्रशिक्षण (तालीम) प्रत्येक जिले मे होनी चाहिए ।
  • माता-पिता (खास तौर से दसवी – बारवी मे अध्ययन कर रहे बच्चों व टीन एजर्स बच्चो के माता-पिता के लिए भी यह प्रशिक्षण देना चाहिए )
  • तालीम (प्रशिक्षण के अंत मे) पुस्तक दी जाए वो बहुत अच्छा ।
  • बच्चो को आत्महत्या निवारण के लिए तैयार करने का मोड्यूल सुरत टीम करेगी ।
  • उसके पश्चात बच्चो के लिए भी ऎसा प्रशिक्षण शुरू करे ।
  • सूरत ग्राम्य जिला पुलिस सुरक्षा सेतु सोसाइटी द्रारा समग्र गुजरात के लिए 24 घंटे कार्यरत जीवन आस्था आत्महत्या निवारण हेल्पलाइन ( टोल फ्री नं- 18602662345) का प्रसार किया जाए । ( प्रसार साहित्य उपलब्ध है । )

बाल अधिकार प्रशिक्षण

  • बाल अधिकार के लिए मोड्यूल बनाएँ ।
  • माता-पिता को जागृत करें ।
  • शिक्षको को जागृत करे ।
  • बाल अधिकार से संबंधित अन्य स्टेकहोल्डर को जागृत करे ।
  • बच्चो को जागृत करे ।
  • प्रवृति संबंधित जागृति कार्यक्रम ।
  • शैशव (भावनगर) के बालसेना जैसे प्रोजेक्ट के साथ बालअधिकार से संबंधित पार्टनरशीप कर सकते है ।
  • उसका अभ्यास करके अन्य जगह बालसेना शुरू करे ।

p4p पीस मोड्युल / पीस एक्टिवीटी

  • पीस मोड्यूल तैयार करे ।
  • शैशव (भावनगर) द्रारा खिलाई जाती पीस गेम्स का अभ्यास करके अगर योग्य लगे तो उसका प्रसार करे ।
  • पीस एक्टिविटी तैयार करें ।

मानसिक स्वास्थ्य (आरोग्य) सप्ताह

  1. माता-पिता के लिए – माता-पिता के मानसिक समस्या व्यवहार के विषय की समस्या / बालपरवरिश पर उसके परिणाम (असर) का मोड्यूल बनाएँ ।
  2. माता-पिता की जागृति कार्यक्रम का आयोजन करें ।
  3. बच्चो टीनएजर्स के लिए
  4. उनकी मानसिक समस्या / रोग के बारे में माहिती प्रदान करके उनके वर्तन में संतुलन स्थापित करकें आत्महत्या निवरण को रोके ।

p4p युवा परिवार सज्जता

  • नवयुवको को विवाह से पूर्व विवाह के लिए और अभिभावकता का प्रशिक्षण प्रदान करे ।
  • युवक खुद ही ‘ ट्रेनर ’ बन के ये कार्य अपने साथिओं के बीच कर सकें ।
  • स्कीट के द्रारा विचार का प्रस्ताव ।

नागरीक धर्म प्रशिक्षण (तालीम)

  • बच्चो को अच्छा नागरीक बनाने का प्रशिक्षण ।
  • एक जिम्मेदार नागरीक बनने का प्रेजन्टेशन तैयार करे । सीवीक सेन्स (नागरीक धर्म) ट्राफिक इत्यादी के बारे में अलग-अलग विषय के मोड्यूल तैयार करे ।
  • प्रत्येक महीने एक विषय की माता-पिता और बच्चो के साथ

बाल परवरिश के विषय में प्रश्नोतरी

  • माता-पिता को बार-बार परेशान कर रहे प्रश्नो के उत्तर तैयार कर के उपलब्ध कराने हेतु का p4p का कार्य महत्वपूर्ण है ।
  • विविध कार्यक्रमो मे उत्पन्न होने वाले प्रश्नो के उतर उस विषय के जानकार निष्णांत के पास से उतर तैयार करके वेबसाइट मे सामिल करे ।
  • बहुत बार प्रश्न दूसरे तरीके से पूछा जाता है और उसका उतर पहले के FAQ मे आ गया होता है । ऎसा भी हो सकता है ।
  • नया प्रश्न तैयार करने से पहले उपरोकत बात जाँच लें ।
  • ये प्रश्नोतरी p4p प्रशिक्षको की क्षमता बढाने के लिए बहुत बार उपयोगी सिध्ध होगी ।

p4p बाल फिल्म प्रोजेक्ट

  • p4p एक विचार अभियान है, जिसमे कोई भी व्यक्ति या संस्था जुड सकती है ।
  • फिल्म सोसायटी सूरत के (FSS) p4p के सक्रिय सभ्य है ।
  • उनका विचार है कि बाल फिल्म बना के बाल विकास मे हिस्सा लेकर बच्चो को प्रेम और आनंदपूर्ण बचपन दें ।
  • FSS और सूरत महानगरपालिका शिक्षण समिति ने MOU किया है ।
  • FSS द्रारा चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी ओफ इंडिया के पास से बाल फिल्में प्राप्त करके वितरण की जाती है, जिसका खर्च शिक्षण समिति प्रदान करेगी ।
  • फिल्म मे से बच्चे लर्निंग आउटकम प्राप्त कर सकें , इस लिए FSS शिक्षको को प्रशिक्षण देगा ।
  • प्रत्येक स्कूल को 1 वर्ष मे 12 फिल्म दिखाने का प्रयत्न करना होगा । परंतु कम से कम 6 फिल्मे अचूक रूप से दिखानी होंगी ।
  • उसका रिपोर्ट इस फोर्मेट मे FSS को दे –
  • नं. स्कूल का नाम दिनांक दिखाई गई फिल्म विधार्थियों की संख्या शिक्षक का नाम
  • अधिक से अधिक शहर उसमे जुडे ।
  • जिस ट्रस्ट के पास अत्याधिक स्कूल हैं वो इसे अपनाए ।

दत्तक बच्चों की परवरिश

  • माता-पिता विहीन माता-पिताकी बाल परवरिश
  • ऎसे बच्चों को दत्तक लेने वाली संस्थाओ की क्षमता बढाकर उनके कार्य का प्रचार-प्रसार करना ।
  • ऎसे गृहो की गृहमाताओ आदि का प्रशिक्षण ।
  • ऎसे बच्चो का काउन्सेलिंग ।
  • ऎसे गृहो मे नियमित काउन्सेलरो की नियुक्ति
  • p4p दत्तक योजना ।

p4p उम्मीद

  • अपनी झुपडपट्टीओं मे गरीबी, अज्ञानता, और व्यसनो से घिरे हुए अभिभावको के घरो में सर्वाधिक बचपन बिखरता नजर आता है । ये बच्चे माता-पिता के प्यार, पोषण उनकी छत्रछाया से वंचित रह जाते है । पढने और खेलने की आयु मे उन्हे काम करना पडता है । बाल मजदूरी और उनका शारीरिक शोषण भी होता है । ये बच्चे के जीवन में जब तक कुछ फर्क नहीं पडेगा तब तक विश्वशांति का सपना पूरा नही हो सकता ।
  • इस क्षेत्र मे न के बराबर काम होता है । थोडा बहुत कार्य बच्चो के क्षेत्र मे किया जाता है, लेकिन अभिभावको मे यदि कार्य किया जाए तो बच्चे को घर मे सतत उसका लाभ मिल्ता रहेगा ।
  • p4p को इसमे अभी बहुत लंबा सफर काट्ना है । इस क्षेत्र में कार्यरत, करने की इच्छा रखते, करने की क्षमता रखने वाले बहुत से लोग एवं संस्थाए इससे जुडे एसी आशा है ।

सूचित कार्य

  • माता-पिता को व्यसन मुकत करना ।
  • उनको बाल परवरिश का महत्व समझाना ।
  • जो बच्चे स्कूल नही जा रहे उन्हे स्कूल भेजना ।
  • माता-पिता को इसके लिए समझाना ।
  • भीख मांग रहे बच्चों को भिक्षावृति से मुक्त करके स्कूल भेजना ।
  • बाल मजदूरी कर रहे बच्चो को मुक्त करके स्कूल भेजना ।
  • इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए अधिक से अधिक स्वयंसेवक तैयार करना ।

p4p उम्मीद : माता-पिता के लिए

  • 10 टीम
  • 3000 माता-पिता

p4p उम्मीद : बच्चो के लिए

  • 10 टीम
  • 400 माता-पिता

बालभवन

  • बालभवन बच्चो व माता-पिता, शिक्षको के लिए महत्वपूर्ण centre of excellence बन सकता है ।
  • सूरत मे बालभवन प्रारंभ करने का कार्य शुरू है ।
  • p4p टीम को अपने शहर में बालभवन शुरू करने के प्रयत्न करने चाहिए ।
  • इस विषय पर मार्गदर्शन श्री सुनीलभाई जैन (9374712867) के द्रारा मिलेगा ।

p4p पेरेन्ट हेल्पलाइन

  • सामान्य तौर पर बच्चो के लिए ( child line )
  • महिला हेल्प लाइन (1095, 181 ) इत्यादी उपलब्ध है ।
  • मात्र पेरेन्टिग के प्रश्नो के लिए पेरेन्ट हेल्प लाइन शुरू करना ।
  • हमेशा के लिए स्थिर हो सके ऎसी व्यवस्था शुरू करने के पश्चात ही पेरेन्ट हेल्प लाइन चालू करनी होगी / चालू करें ।

p4p के माध्यम से चाइल्ड लाइन चलाना

  • बच्चो के लिए हेल्पलाइन (1098) NGO द्रारा चलाई जाती है ।
  • p4p NGO नही है इस कारणवश वे ये हेल्प लाइन नही ले सकते ।
  • लेकिन p4p से जुडे हुए NGO एसी हेल्पलाइन प्राप्त करके, फलदायी रूप से चलाएँ ।
  • ऎसा करने का हेतु ये है कि वर्तमान मे हो संस्थाएँ चाइल्ड लाइन चला रही है, वे अत्याधिक अंश मे प्रतिक्रियात्मक हेल्प लाइन है ।
  • बच्चे के द्रारा जब मदद की मांग की जाती है तब पहुँच तो जाती है लेकिन बाल अधिकार की जागृति का कार्य करके खुद जाकर, अपना कार्य बढाकर बच्चे को अच्छा बचपन प्रदान करने का कार्य न के बराबर करती है । उदाहरण : स्कूलो मे और घरो मे बच्चो के साथ हो रही हिंसा ने स्वीकृति का स्थान ले लिया है ।
  • p4p ये वातावरण बदलना चाहती है ।
  • p4p यदी चाइल्ड लाइन चलाए तो, ये काम सक्रियता से कर सकती है ।
  • चाइल्ड लाइन द्रारा ही पेरेन्ट काउन्सेलिंग का कार्य किया जा सकता है ।
  • इसके बावजूद भी माता-पिता के लिए अलग हेल्प लाइन की आवश्यकता दिखे तो –
  • चाइल्ड लाइन सफलतापूर्ण असरदायी तरीके से चलाने के बाद माता-पिता के लिए हेल्प लाइन p4p शुरु कर सकता है ।

p4p खोज संशोधन

  • कॉलेज युनिवर्सिटी के साथ संलग्न होकर इस विषय से सबंधित प्रोजेक्ट ले ।

p4p लाइब्रेरी

  • बाल परवरिश से सबंधित साहित्य पुस्तके, सी.डी. फिल्म आदि एक जगह पे ही उपलब्ध करना ।
  • अनुकूलतानुसार p4p ऎसी लाइब्रेरी शुरू कर सकता है ।

p4p ध्यान विपश्यना :

  • भगवान बुद्ध के द्रारा 2500 वर्ष पूर्व पुर्नजीवित की गई ध्यान पद्धति है ।
  • विपश्यना ध्यान की प्रथम सीढी आनापान ध्यान है ।
  • आनापान (आन+अपान) तात्पर्य ये है कि नाक में से आ रहे और जा रहे श्वास के प्रति सजग (जागृत) होना ।
  • आँखे बंध करके देखना (एहसास करना) के श्वांस किस नसकोर (दाहिने या बाँए या दोनो) में से आती-जाती है ।
  • ये ध्यान करने से मन शांत हो जाता है ।
  • बच्चे प्रतिदिन 5-10 मिनिट आनापान करे तो –
    1. मन का भटकना (विचलित होना) कम हो जाता है ।
    2. एकाग्रता बढती है ।
    3. मन शांत हो जाता है ।
    4. प्रतिक्रिया (चिढ जाना, रो पडना, गुस्से हो जाना, मन ही मन क्रोधित होना ) कम हो जाता है ।
    5. खास तौर से (तरूण) (टीन एज बच्चों) मे बहुत फायदा होता है ।
    6. ये उम्र पढाई की उम्र है लेकिन इसी उम्र में बच्चे माता-पिता के साथ संघर्ष स्थापित करते है । मित्रो के आचार-व्यवहार से परेशान हो जाते हैं । T.V., मोबाईल, मीडिया का अत्याधिक उपयोग करते है । जिस से उसके अभ्यास तथा भविष्य पर बहुत ही विपरीत असर पडने की संभावना रहती है ।
    7. आनापान ध्यान इस पर लगाम लगाता है ।
    8. माता-पिता के साथ संघर्श कम हो जाता है । संबंधोमे सुधार आता है । माता-पिता के द्रारा बच्चो के साथ हिंसा, गलत व्यवहार होने (करने) की संभावना घट जाती है ।
    9. घर मे शांति बढती है ।
    10. परोक्ष (अप्रत्यक्ष) रूप से p4p का कार्य होता है ।
    11. ऎसे बहुत से उदाहरण है जहाँ आनापान के कारण स्कूल के बोर्ड परीक्षा का परीक्षाफल 40% प्रतिशत से बढकर 100 प्रतिशत तक पहुँचा है ।
    12. महाराष्ट्र की प्रत्येक स्कूल में प्रार्थना के समय आनापान ध्यान करवाया जाता है ।

विपश्यना

  • विपश्यना यानी कुछ अलग तरीके से देखना ।
  • विपश्यना ध्यान की 10 दिन के शिबिर मे 3 दिन आनापान ध्यान करना होता है ।
  • जिस कारण वश शरीर मे हो रही सूक्ष्म संवेदनाएँ (खुजली, दर्द, ठंड लगना, भीगापन, गर्म, हिलना-डुलना) का एहसास होता है ।
  • अपने शरीर मे आँख, कान, नाक, त्वचा, जीभ द्रारा इन्पुट शरीर में जाता है ।
  • मन उसका पृथ्थकरण करता है ।
  • अच्छा होता है तो शरीर पर अच्छी लगती संवेदना होती है और अर्धजागृत मन एसी संवेदनाएँ और आएँ एसी कल्पना करता है ।
  • जो संवेदनाएँ हमे अच्छी नही लगती यदि वो हमारे अंदर आती है तो मन उनके न आने की कामन करता है ।
  • जैसे- कान के दरवाजे पर कोयल की किलकारी पडती है ।
  • मस्तिस्क उसे पृथ्थकरण करता है ।
  • शरीर पर मनचाही संवेदनाएँ उत्पन्न होती है ।
  • मन उसकी कामना करता है । ( ये प्रतिक्रिया हुई)
  • कान के दरवाजे पर गाली पडती है ।
  • मस्तिस्क उसका पृथ्थकरण करता है ।
  • शरीर पर अनचाही संवेदना उत्पन्न होती है ।
  • अर्धजगृत मन उसके लिए द्वेष करता है – और हम गुस्सा करना, सामने वाले व्यक्ति को अपशब्द बोलना, कुछ बोलना नहीं लेकिन अंदर ही अंदर गुस्से से ओत-प्रोत हो जाना जैसी प्रतिक्रियाएँ करना ।
  • इस प्रकार अपना संपूर्ण व्यवहार संवेदनाओ के प्रति उत्पन्न राग और द्वेष मे से पनपती प्रतिक्रियाओ से चलता है ।
  • प्रतिक्रिया हमें परेशान करती है, पीडा देती है, भविष्य के कर्म उत्पन्न करती है ।
  • भविष्य, आने वाले जन्म को दूसरी ओर रखे फिर भी रोज रोज की प्रतिक्रियाएँ हमे पीडा देती है, संबंध बिगाडती है, मनोसंघर्ष को जन्म देती है ।
  • विपश्यना यानी कि विशेष (अलग तरीके से) देखना ।
  • अभी तक हम प्रत्येक संवेदनाएँ भोग रहे थे या फिर यूँ कहे कि सहन कर रहे थे – कितनी राग गाकर तो कितनी ही द्वेष करके – खुजली करके, दुखी होकर, दु:खद संवेदना की टीका – टिप्पनी करके – (अरे – ये दु:ख मुझे बहुत पीडा देता है ऎसा भाव उत्पन्न करके ) और सुखद संवेदना ( जैसे – मिठाई के स्वाद या प्रसंसा के शब्द ) का आनंद उठाकर हम भुगत रहे थे ।
  • विपश्यना संवेदना सहने की आदत से हमे मुक्त करना चाहती है ।
  • 10 दिन की शिबिर मे 3 दिन के आनापान के बाद विपश्यना (विशेष रूप से देखना) शुरू होता है ।
  • सर से पैर तक और पैर से सर तक शरीर के छोटे-छोटे भागो पर मन से नजर करते रहना और मात्र संवेदना को देखते रहना । उसे सहन न करना, वो अच्छी है या खराब ऎसे भाव उत्पन्न किए बिना केवल देखना ।
  • इस प्रकार संवेदना के प्रति समानता रखने का अभ्यास सात दिन तक किया जाता है ।
  • अब कोई अपशब्द बोलता है या फिर प्रशंसा के शब्द बोलता है तब अर्धजागृत मन प्रतिक्रिअय दिखाने के बदले उसके प्रति समानता रखता है । प्रतिक्रिया नही करता । प्रतिक्रिया से संपूर्ण मुक्त नही होते तो भी प्रतिक्रिया धीमी पड जाती है ।
  • अर्धजागृत मन मात्र अनुभव (एहसास) की भाषा समझता है ।
  • सिर से पैर और पैर से सर तक संवेदना देखने की यात्रा दरम्यान अर्धजागृत मन एहसास करता है कि कोई संवेदना हंमेशा के लिए टिकनेवाली नहीं होती । पहले या देर से अदृश्य हो जाती है । खुजली होती है, और देखते ही देखते अदृश्य हो जाती है ।
  • मन कहता है कि पाँच इन्द्रियो से उत्पन्न इन्पुट से जन्म लेने वाली संवेदना हमेशा टिकनेवाली नही है । पहले या देर से जाने वाली नहीं है । तो उसमे प्रसन्न अप्रसन्न (द्रेष) का भाव कैसा ? उसके लिए क्यो प्रतिक्रिया करके दु:खी हो
  • ये सब कहने से या सोंचने से कुछ होता नही है क्योकि अर्धजागृत मन उस भाषा को समझता नही है । ये तो अपने आप अनुभव से होता है । मन अपने आप शांत हो जाता है ।
  • इमोशनल इन्टेलिजन्स सिखनेवाले कहते है कि स्टीमुली व रीस्पोन्स के बीच यदि छोटा सा बोज लें तो ((Stimuli pause Response) emotionally intelligent व्यवहार करने मे गिनती होगी । प्रतिक्रिया नही होगी, संबंध नही बिगडेगे ।
  • इमोशनल इन्टेलिजन्स सिखनेवाले कहते है कि स्टीमुली व रीस्पोन्स के बीच यदि छोटा सा बोज लें तो ((Stimuli pause Response) emotionally intelligent व्यवहार करने मे गिनती होगी । प्रतिक्रिया नही होगी, संबंध नही बिगडेगे ।
  • विपश्यना ये pause देती है – प्रतिक्रिया घटती है ।
  • माता-पिता तथा शिक्षकगन विपश्यना करे तो स्वयं शांत हो जाते है । बच्चों के साथ व्यवहार सुधर जाता है । बालहिंसा न उत्पन्न हो जिस कारण भविष्य के शांत नागरिक जन्म ले ।

प्रवृति

  • p4p टीम बच्चो को आनापान कराए ।
  • माता-पिता व शिक्षको के लिए विपश्याना परिचय का आयोजन करे ।
  • खुद विपश्यना शिबिर करके खुद ही अनुभव करें ।
  • आनापान के कारण बच्चो मे आ रहे बदलाव (परिवर्तन) के कारण माता-पिता भी विपश्यना की तरफ आकर्षित हों एसा हो जाए ।
  • प्रत्येक जगह विपश्यना के मित्र आकर बाल आनापान कराएँगे । विपश्यना परिचय का आयोजन करेंगे ।
  • राजकोट : 0281-2220861,2782550
  • बाडा (कच्छ): 0283-4273303,273304
  • धोड्का : 9426419397,271429469
  • मोगर : 0265-2341323
  • धर्मज : 253315
  • महेसाणा : 0276-2254634,253315
  • नवसारी 02637291100

यदि किसी से संपर्क न हो तो श्री नरेन्द्रभाई 9825162226

दक्षिण गुजरात मे इस प्रवृति के लिए नरेन्द्रभाई के साथ सीधे संपर्क कर सकते है ।

स्वयंसंचालित – व्यवस्थाएँ

  • p4p स्कूल शिक्ष, अभिभावक मंडली का मुख्य उदेश्य एसी स्वयंसंचालित व्यवस्था उपस्थित करने का है जिससे p4p प्रवृतियाँ स्वयं संपन्न होती होती जाएँ ।
  • स्वामी नारायण धर्म, स्वाध्याय परिवार, गायत्री परिवार आदि संगठनो मे ऎसी स्वयंसंचालित व्यवस्थाएँ है । गुजरात सरकार का स्वागत online ये ऎसी दूसरी व्यवस्था है जिसमें लोगो के प्रश्न सुनने का अवसर अपने आप मिल जाता है ।

p4p स्कूल

हमारे विधार्थि हमारे बच्चे है । हमे बहुत प्यारे है और हमे उन्हे अच्छे से अच्छे रूप मे सुसंस्कृत करना चाहते है, इससे –

  1. बच्चो को शार्रीरिक हिंसा नही दी जाएगी एसी प्रतिज्ञा हम सारे शिक्षक एक साथ मिलकर करेंगे ।
  2. बच्चों के साथ (सूक्ष्म) मानसिक हिंसा ना की जाए एसी प्रतिज्ञा हम शिक्षको के साथ मिलकर करेंगे । (सूक्ष्म हिंसा यानि कि बच्चो को शब्दो से अपमानित करना, बच्चो को खडे रखना, अंगूठा पकडाने जैसी शिक्षा बच्चे की अन्य के साथ तुलना जिससे कि दूसरे बच्चो के बीच अपमानित हो )
  3. बच्चो को शारीरिक शिक्षा न दी जाए तथा उन्हे अपमानित न किया जए एसा विज्ञापन हर तीन महीने मे प्रार्थना के समय करेंगे ।
  4. जिस शिक्षक से ये नियम टूटॆगा तो उसका बचाव न करके बच्चे से क्षमा- याचना कर लेगा और भविष्य मे दोबारा कभी एसा न करने का वचन देगा ।
  5. अभिभावको को प्रत्येक महीने एक घंटे का प्रशिक्षण दिया जाए । हर महीने संभव न हो तो हर दो महीने मे दो घंटे का प्रशिक्षण दिया जाए । वर्ष भर मे 12 घंटे का प्रशिक्षण दे –
  6. प्रशिक्षण मे माता-पिता से ये प्रतिज्ञा लिवाएँ कि वे –
    • बच्चो को शारीरिक शिक्षा ना करे, साथ में मानसिंक हिंसा भी ना करे ।
    • बच्चे को अपमानित न करे ।
    • – बच्चे के साथ हर 15 दिनो मे उससे उस बारे मे बात करे ।
    • – बच्चा गलती करेंगा तब माफी मांगेगा और भविष्य मे दोबारा एसा न करने का वचन देगा ।
  7. हर शिक्षक वर्ष मे बालपरवरिश से संबंधित कम से कम दो पुस्तक पढेगा ।
  8. कक्षा में कम से कम 10 % बच्चों मे से पढने लिखने – गीनने के अलावा अन्य उनमे छुपी प्रतिभा को ढूंढ ले और उस बारे मे अभिभावक से बात करें । वे उनकी प्रवृतिओ को प्रोत्साहित करेगे ।
  9. स्कूल मे शिक्षण मे आ रही समस्याओ की समझदारी से संबंधित दो घंटे के प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा । जिसमे प्रत्येक शिक्षक तथा अभ्यास मे कमजोर बच्चो के माता पिता भाग लेंगे ।
  10. शिक्षक साल भर मे कम से कम एक बार अपनी कक्षा के प्रत्येक बच्चे घर मुलाकात मे जाएँगे और माता-पिता के साथ बात करेंगे ।
  11. દરેક શિક્ષક વર્ષમાં પાંચ વાલીઓને વ્યરસન મુકત કરવાનો સનિષ્ઠ પ્રયાસ કરશે.
  12. प्रत्येक शिक्षक वर्ष मे 5 अभिभावको को व्यसन मुकत करने का सनिष्ठ प्रयास करेगा ।
  13. ये नियमो का चार्ट स्कूल मे लगागेगा ।

p4p शिक्षक

मेरे विधार्थि मेरे बच्चे है । मुझे बहुत प्यारे है और मै उन्हे अच्छे से अच्छे रूप मे सुसंस्कृत सभ्य बनाना चाहता हूं, इसलिए –

  1. मै अपने बच्चो, विधार्थिओ के साथ क्भी किसी भी प्रकार की शार्रीरिक शिक्षा नहीं करूँगा । ये प्रतिज्ञा मै अपने जीवनसाथी, परिवार, और मित्रो के समक्ष भी पुन: घोषित करूँगा ।
  2. बच्चों के साथ मानसिक हिंसा कभी भी नही करूँगा । मानसिक हिंसा यानि की उन्हे शब्दो से अपमानित करना, दूसरे बच्चो के साथ तुलान करके अपमानित करना, अंगूठा पकडवाना, खडे रखना, कक्षा के बाहर निकाल देना जैसा कोई भी दंड नहीं दूगा ।
  3. बच्चो के साथ शारीरिक या मानसिक हिंसा नही करूँगा , उन्हे अपमानित नहीं करूँगा ऎसी मेरी ली हुई प्रतिज्ञा की घोषणा घर मे और स्कूल की प्राथना मे प्रत्येक तीन महीने करूँगा ।
  4. यदी मुझसे ये नियम टूट जाता है फिर भूल हो जाती है तो उसका बचाव न करके बच्चे से माफी माँगूगा और पुन: एसा नहीं होगा एसा वचन दूँगा ।
  5. अभिभावको को इस विषय पर प्रत्येक महीने एक घंटे का अथवा प्रत्येक दो महीने मे दो घंटे का प्रशिक्षण प्राप्त हो एसा करूँगा, और अभिभावको से प्रतिज्ञा लिवाऊँगा कि वो –
    • बच्चो को शारीरिक दंड न दें ।
    • बच्चे के साथ मानसिंक हिंसा ना करे, उसे अपमानित न करे ।
    • बच्चे से हर 15 दिनो मे इस विषय पर बात करे ।
    • भूल कर बैठे तब बच्चे की माफी मांगेगा और भविष्य मे एसा नही होगा इसका वचन देगा ।
  6. वर्ष मे बालपरवरिश से संबंधित कम से कम दो पुस्तक पढेगा ।
  7. साल मे कम से कम 10 % बच्चों मे से उनके पढने लिखने, मनन करने की क्षमता के अतिरिक्त उअनमे छिपी प्रतिभा को जान लें और उस बारे मे बच्चे और माता-पिता से बात करूँगा । और इस प्रवृति को प्रोत्साहित करूँगा ।
  8. स्कूल मे शिक्षण मे आ रही समस्याओ की समझ के लिए दो घंटे का प्रशिक्षण का आयोजन करेंगे जिसमें अभ्यासमे कमजोर बच्चो के माता-पिता और शिक्षक प्रतिभाग लेंगे । p4p द्रारा इस विषय मे मोड्यूल पूर्ण किया जाएँगा । कोइ एक शिक्षक इस विषय पर प्रशिक्षण देगा ।
  9. मै अपने कक्षा के प्रत्येक बच्चे के घर की कम से कम एक बार मुलाकात करूँगा और उसके माता-पिता के साथ बात करूँगा ।
  10. मै और प्रत्येक शिक्षक साल मे कम से कम 5 अभिभावको को व्यसन मुकत करने के लिए सच्चे दिल से प्रयत्न करूँगा ।
  11. “बच्चे” शब्द मे मेरे खुद के बच्चे भी आ जाते है ।
  12. ये नियमो का चार्ट स्कूल मे लगाया जाएगा ।

p4p माँ-बाप

मेरा बच्चा मुझे बहुत प्यारा है और मै उसकी सर्वोतम परवरिश करना चाह्ता हूँ इसलिए –

  1. मै अपने बच्चो को कभी शार्रीरिक दंड (मारना) नहीं दूंगा ।
  2. अपने बच्चे के साथ मानसिक हिंसा भी कभी नही करूँगा । उसे शब्दो से अपमानित भी नही करूँगा । मानसिक हिंसा यानि कि उसे अंगूठा पकडाना, दूसरे के साथ तुलना करके उसे निंचा दिखाना, उसे कमरे मे या बाथरूम (स्नानघर) मे बंद करना या फिर खाना न देना एसी किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं करूँगा ।
  3. बच्चे के साथ शारीरिक या मानसिक हिंसा नही करूँगा एसी बात घर में तथा स्कूल में प्रत्येक पंद्रह दिनो मे करूँगा ।
  4. यदी मुझसे नियम टूट जाएंगे या फिर गलती हो जाएगी तो अपनी गलती का बचाव न करके बच्चे से माफी मांग लूँगा और पुन: एसा न करने का वचन दूँगा ।
  5. बल परवरिश से संबंधित साल मे 6 घंटे का प्रशिक्षण लूँगा ।
  6. साल मे बाल परवरिश से संबंधित कम के कम दो पुस्तक पढूँगा ।
  7. अपने बच्चे की प्रतिभा, योग्यता को पहचान कर उस बारे मे शिक्षक से बात करूँगा और वो प्रवृति करने के लिए उसे प्रोत्साहित करूँगा ।
  8. वर्ष भर मे कम से कम छ: बार शिक्षक से मिलूँगा ।
  9. यदी मे किसी प्रकार के व्यसन का आदी होऊँगा तो बच्चे के हित के लिए उसे भी छोड दूँगा ।
  10. प्रत्येक तीन महीने मे एक बार बच्चे की पसंद का पुस्तक बच्चे के पास पढूँगा अथवा बच्चा पढेगा और मै सुनूंगा ।
  11. मेरा बच्चा जैसा है मैं उसे वैसे ही स्वीकार करूँगा और महीने में एक बार मीटिंग रखके घर में सभी सदस्यो की उपस्थिति मे उसके अच्छे गुणो की, उसके योग्यता की बात करूँगा ।
  12. सप्ताह में कम से कम 1 बार बच्चे की इच्छानुसार उसके साथ खेलूँगा ।
  13. महिने मे 4 बार बच्चे के साथ चलने जाऊँगा और जो उसे अच्छी लगे एसी प्रवृति करूँगा ।
  14. मै p4p माँ-बाप बनूँगा और प्रत्येक महीने दूसरे पाँच माता-पिता को p4p माता-पिता बनने के लिए प्रोत्साहित करूँगा ।
  15. इन नियमो का चार्ट घर मे लगाऊँगा ।

Support Structure

  • व्यक्ति खूद को अंदाज सके (ISO 9000) की तरह एसा ढाँचा तैयार करें ।
  • ये लोग टिक सके इस लिए उन्हे विश्वास मिले एसी Nurturing Activities निश्चित करे ।
  • जैसे p4p शिक्षक सम्मेलन,
    p4p अभिभावक सम्मेलन इत्यादी
    (अमीबेन, गिरीशभाई, भरतभाई की टीम)

p4p महिला मंडल

  • महिला मंडल अन्य प्रश्नो की चर्चा / प्रवृतियाँ कर रही होती है । p4p महिला मंडल बाल परवरिश से सबंधित प्रवृतियाँ करेगा ।
  • स्वयं की बाल परवरिश से सबंधित क्षमता बढाएगा ।
  • महीने मे एक बार ( जैसे चौथे बृहस्पतिवार को रात्रि के 9 बजे ) मिलना होगा ।

p4p अभिभावक मंडली

  • p4p अभिभावक मंडली
  • स्वयं की बाल परवरिश की क्षमता बढाने की प्रवृतियाँ करेंगे ।

p4p व्यवस्था

p4p ढाँचा ( कर्तव्य और जिम्मेदारियाँ )

  • टाउन, शहर, ग्राम विस्तार की टीम ।
  • सर्व सहमति से पसंद किए गए संगठक ( coordinate) सह संगठक (co-ordinator)
  • गठक और सहसंगठक द्रारा ही केन्द्र के लेटर हेड का उपयोग हो सके और उनके द्रारा ही हो सके ।
  • व्यक्तिगत या संस्था का विजि़टिंग कार्ड छपाना नहीं है ।
  • व्यक्ति के व्यक्तिगत विजिटिंग कार्ड मे p4p का उपयोग करना नही हैं ।

p4p कोम्युनिकेशन

p4p Whatsaapp Groups

(1) कोम्युनिकेशन गृप

जैसे- p4p Dharampur Communication Group

  • केवल काम के संदेशो के आदान-प्रदान के लिए ।
  • इसके अलावा कोई संदेशा भेजना नहीं है ।
  • (2) Inspiration Group

    जैसे- p4p Dharampur Inspiration Group

  • केवल पेरेन्टिंग से संबंधित प्रेरणात्मक संदेश भेज सकते है ।
  • अन्य प्रेरणात्मक संदेशो का यहाँ स्थान नहीं है ।
  • स्वयं की, स्वयं के व्यवसाय के या फिर वो जिस मुद्दे विचारधारा या उसमे मानते हो या फिर उसका विरोध कर रहे हो उनका विचार व्यक्त करने के लिए गृप कद्दापि नहीं है ।
  • Email communication:

    દાजैसे P4Pdharampur@gmail.com

    गूगल गृप P4Pdharampur@googlegroup.com का उपयोग कर सकते है ।

  • उससे एक साथ पूरे गृप को मेसेज भेज सकते है ।
  • उसकी जिम्मेदरी एक दो लोगों को ही सौंपे एवं पासवर्ड गुप्त रखे । जिससे कोई भी व्यक्ति कुछ भी (अस्त-व्यस्त) न लिख सके ।

p4p ऑफिस

मुख्य कार्य

  • पत्र व्यवहार
  • ई-मेइल व्यवहार
  • न्यूझ लेटर बनाना
  • लोगो का संपर्क करना
  • अलग अलग व्यक्ति खुद के स्थल / समय मे ये काम स्वैच्छिक रूप से करके ऑफिस चलाते है । (चलती-फिरती ऑफिस)

p4p दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग

p4p का मुख पत्र

  • टीमो के मार्गदर्शन के लिए
  • एक टीम का कार्य दूसरी टीमो के लिए प्रेरणादायक बने ।
  • प्रवृतियो से प्रेरित होकर दूसरे लोग भी जुडे ।
  • अपने किए हुए कार्य का ऎसा दस्तावेज बने जो हमेशा उपलब्ध हो सके । जो भविष्य मे जब भी चाहे तब उपलब्ध हो जाए ।

अपने किए हुए कार्य का ऎसा दस्तावेज बने जो हमेशा उपलब्ध हो सके । जो भविष्य मे जब भी चाहे तब उपलब्ध हो जाए ।

  • प्रत्येक मासिक एहवाल गुजराती तथा अंग्रेजी मे देर से देर उसके बाद के महिने की 5 वी तारीख तक भेज दें जीससे उसको मुखपत्र मे संम्मिलित कर सकें ।
  • p4p ऑफिस द्रारा खुद रिपोर्ट तैयार करके गुजराती या अंग्रेजी मे अनुवाद करके मुखपत्र मे सामिल करना संभव नही है ।
  • आप कार्य करेंगे और एहवाल न मिलने के कारण मुखपत्र मे सामिल न होने से आपके टीम के सभ्यो को दूसरे टीम को प्रोत्साहित करने का तथा अभियान का विस्तार करने का अवास्र हम चूक जाएँगे ।
  • अपने कार्य की सूचना मासिक, त्रिमासिक, अर्धवार्षिक या वार्षिक आंकीय सूचना उपलब्ध रहे इस लिए प्रत्येक कार्यक्रम की सूचना हर महीने की 5 वी तारीख को (उसके पहले के महीने की) अवश्य भेज दें ।
नं दिनाक समय कार्यक्रम का स्थल ग्राम / शहर का नाम वक्ता का नाम श्रोता का प्रकार रीमार्कस
माता-पिता शिक्षक अन्य

व्याख्यानो का रेकोर्डिंग

  • महत्वपूर्ण विषय, असरकरक वक्ता और अच्छी साउन्ड सिस्टम की अनुकूलता हो तब व्याख्यानो का ओडियो / वीडियो रेकोर्डिंग करे ।
  • ऑडियो रेकोर्डिंग की उपयोगिता वीडियो की अपेक्षा अधिक है क्योंकि व्यक्ति कही भी घूमते – फिरते, काम करते हुए / यात्रा के दौरान सुन सकते है ।
  • वीडियो रेकोर्डिंग मे से ऑडियो आसानी से सुना जा सकता है ।
  • ऑडियो रेकोर्डिंग अधिक आसान है । मोबाइल मे भी रेकोर्डिंग हो सकती है ।
  • ये साहित्य Website उपर अपलोड करने से लोगो के उपयोग मे आ सकती है ।

p4p स्कीट का रेकोर्डिंग

  • स्कीट बहुत कम समय मे असरदायी रूप से अपना संदेश पहुँचती है ।
  • अच्छी स्कीट का यदि संभव हो तो दो केमेरो से वीडियो रेकोर्डिंग करें ।
  • वैभव – विराज को p4p परिचय की 15 मिनिट की स्कीट तैयार करके रेकोर्ड करानी होगी ।

कार्यकरो का क्षमतावर्धन

ट्रेनर्स ट्रेनिंग

  • p4p मे काम कर रहे लोगो की क्षमता बढाने के लिए उनके लिए TOT (Training of Trainers ) का आयोजन करना चाहिए ।
  • एक अथवा दो दिन का तालीम कार्यक्रम का उपायोजन कर सकते है ।
  • एक दिन मे 6 से 8 विषय ले ले ।

तालीम (प्रशिक्षण) के विषय

  • परिवार व्यवस्था की बच्चे पर असर
  • नशीले द्रव्यो का सेवन
  • क्रोध – गुस्सा
  • जातीय शिक्षण
  • तनाव मुक्ति के उपाय
  • तरूणो की परवरिश – मार्गदर्शन
  • बाल वर्तन
  • बाल परवरिश द्रारा सुक्ष्म हिंसा निवारण
  • बाल परवरिश की पद्धति
  • बालक के साथ व्यतित गया समय
  • बच्चो के साथ संवाद
  • बच्चो के भोजन के विषय मे
  • मीडिया की बच्चो पर असर
  • मूल्य
  • शांति के लिए बाल परवरिश
  • शिस्त
  • सर्वांगी विकास – श्रेष्ठ विकास

किसके लिए ऎसे प्रशिक्षण का आयोजन करे ?

  • p4p टीम के सभ्यो के लिए ।
  • टीम मे जुडना चाहते लोगो के लिए
  • प्रशिक्षण देने से टीम मे जुडने की संभावना
  • उपस्थित हो ऎसे लोगो के लिए ।
  • टीम मे न जुडे लेकिन खुद की स्कूल, संस्थामें शिक्षक, अभिभावको के प्रशिक्षण करने की इच्छा घारण करने वाले लोगो के लिए ।
  • प्रशिक्षक के रूप मे कार्यरत लोग जो अपने समय बिना किसी कीमत के p4p के लिए निकालना चाहते हो ।

सूचना : p4p क़ॆ प्रशिक्षण की प्रवृति बिना किसी मूल्य के की जाती है इसलिए ट्रेनर्स के प्रशिक्षण की भी कोई फीश नहीं रहेंगी । लेकिन चाय-पानी, नास्ता, भोजन का हुआ हो उतना खर्च ले सकते है । किसी संस्था का होल उपयोग मे ले उसका खर्च न करे ।

वैभव परीख : – 9099010677

स्वयंसेवक के जीवन मे बदलाव

  • व्यक्ति बच्चो को प्रेम और आनंदमय बचपन प्रदान करने के उद्देश्य से p4p अभियान मे जुडते है ।
  • बच्चो का कार्य उसे प्यारा है, इससे वे अभियान मे जुडते है ।
  • स्वयंसेवक के जीवन मे आता बदलाव व्यक्ति को अभियान मे जोडने के लिए प्रोत्साहन प्रदान कर सकता है ।
  • व्यक्ति अपनी मर्यादाओ के जूट रखकर असरदायी रूप मे सामाजिक प्रदान नहीं कर सकते है ।
  • अभियान मे जुडकर व्यक्ति को बदलना चाहिए ।
  • अहं बिना पद, प्रतिष्ठा पैसे की लालसा के बिना बच्चो को प्रेम और आनंदपूर्ण बचपन देने के पवित्र उद्देश्य से कार्य करने के लिए व्यक्ति मे बदलाव आवश्यक है ।
  • अहंभाव बिना टीम भावना से कार्य करने के लिए भी ये बदलाव जरूरी है ।
  • व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होगा तो उसके योगदान की गुणवता मात्रा बढेगी ही ।
  • इस लिए स्वयंसेवक के व्यक्तित्व निर्माण की प्रवृतियाँ अभियान के महत्व की प्रवृति है ।
  • स्वयंसेवक के व्यक्तिगत जीवन तथा सामाजिक कार्य करने की क्षमता में बढावा हो एसी प्रवृतिओ का आयोजन करे ।
  • उसकी योग्यता का लाभ उसके व्यावसयिक जीवन मे भी हो सके जैसे कोम्युनिकेशन क्षमता के विकसित होते ही उसके व्यवसाय मे फायदा हो, वक्ता, ट्रेनर के रूपमे उसकी क्षमता बढे ।

P4P Leadership Program:

  • p4p leadership Prog. इस उद्देश्य से ही शुरू किया गया है । .
  • p4p leadership program
  • दस सप्ताहो का प्रशिक्षण
  • सप्ताह मे 1 दिन 3 घंटे
  • प्रशिक्षण के दौरान व्यकित एक p4p Project लेगा और एक व्यक्तिगत, व्यावसायिक जीवन का प्रोजेक्ट लेगा ।
  • जीवन के किसी भी पहलू मे बद्लाव लाने के लिए वो प्रोजेक्ट बनाकर उसे कार्यांन्वित करने की क्षमता कार्यकर मे उत्पन्न करना ही इस कार्यक्रम का उद्देश्य है ।
  • कार्यक्रम की क्षमता बढाने के लिए Role based प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कर सकते है –
    1. सूचित रोल बेज्ड प्रशिक्षण
    2. ट्रेनर का प्रशिक्षण
    3. Public Relation का प्रशिक्षण
    4. युवा परिवार सज्जता मोड्युल शुरू करने का प्रशिक्षण ।
    5. आत्महत्या निवारण कार्यक्रम देने का प्रशिक्षण ।
    6. डिस्लेक्षीया के विषय में ट्रेनर बनने का प्रशिक्षण ।
    7. स्कीट करने का प्रशिक्षण ।

p4p परिवार निर्माण

  • p4p परिवार निर्माण
  • प्रदेश कक्षा का 6 मासिक कार्यक्रम
  • p4p परिवार परिसंवाद – कार्य की दिशा, अनुभव, ट्रेनिंग सामग्री आदि के विषय मे आलोचनात्मक चर्चा ।
  • p4p पिअकनीक / उत्सव
  • p4p के कार्यकर कोई आनंददायक स्थान मे मिले, आनंद प्रमोद से समूह प्रवृतियाँ करें ।
  • यदि समय मिले तो एकादि घंटे मिलके काम की बात करे ।
  • उत्सव में कार्यकर्ता के परिवार वाले भी जुडे ।
  • उत्सव का खर्च खुद करे ।
  • परिवार प्रवृतियो के कारण लोग एक-दूसरे को पहचानेंगे, जुडेगे, एक ही परिवार के सदस्य हैं एसी परिवार भावना जन्म लेगी ।
  • किसी गाँव में p4p कार्यकर्ता किसी कार्य के लिए जाएँगे तो वहाँ के कार्यकर्ता से मिलने की इच्छा होगी, इस के लिए प्रयत्न करेगा ।
  • स्वयं संचालित व्यवस्थाएँ उत्पन्न करना है जीससे p4p प्रवृतियाँ खुद ही होती जाएँ ।
  • स्वामी नारायण धर्म, स्वाध्याय परिवार, गायत्री परिवार आदि संगठनो मे ऎसी स्वयंसंचालित व्यवस्थाएँ हैं ।